कबीरधाम! दरअसल मामला है गृह मंत्री विजय शर्मा के गृह जिले में स्थापित धान संग्रहण केंद्र का जहां कार्यरत कर्मचारी ने नाम नहीं बताने के शर्त पर बताया कि धान संग्रहण केंद्र प्रभारी के द्वारा राज्य शासन को पांच करोड़ से भी ज्यादा का नुकसान पहुंचाया गया है ।
पढ़िए आखिर पूरा मामला क्या है विस्तार से 👇
ज्ञात हो कि प्रितेश कुमार पाण्डेय कवर्धा जिला कबीरधाम में क्षेत्र सहायक के पद पर विगत तीन वर्ष से पदस्थ है। अधिकारियों के छत्रछाया में विभागीय कार्यों में भारी अनियमितता एवं विभाग तथा शासन को लाखों करोड़ों का नुकसान पहुचाया जा रहा है।अपने यूनिट के दैनिक कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। इनके प्रताड़ना से दो दैनिक कर्मचारी की मृत्यु हो चुकी है जो जांच का विषय है एवं अन्य कर्मचारी परेशान है। गत वर्षों में खाद्य संग्रहण केंद्र कवर्धा एवं लोहारा का प्रभारी के तौर पर कार्य की अनियमितता की शिकायत पर गतवर्ष स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ ।श्री प्रितेश कुमार पाण्डेय द्वारा धान संग्रहण केंद्र बाजार चारभाठा में भारी भ्रष्ट्राचार किया जा रहा है। संग्रहण केंद्र में 646486 क्विंटल धान भंडारण है। वर्तमान में प्रदाय के समय 6.27 % की कमी आ रही है। वो इसलिए है कि समितियों से जो धान प्राप्त हुआ है,वजन में कम होने के बावजूद 40 किलो प्रति बोरे के हिसाब से पावती प्रदान कर समिति एवं परिवहनकर्ता को लाभ पहुंचा है तथा लाखों करोड़ों का नुकसान शासन को किया गया है। समितियों से जो धान प्राप्त हुआ है, वजन में कम होने के बावजूद 40 किलो प्रति बोरे के हिसाब से पावती प्रदान कर समिति एवं परिवहनकर्ता को लाभ पहुंचा है तथा लाखों करोड़ों का नुकसान शासन को किया जा रहा है। धान संग्रहण केंद्र बाजार चारभाटा के प्रभारी द्वारा काले कारनामों को करने के लिए कैमरे को बार-बार बंद किया गया इस पर अधिकारियों को संज्ञान में लेना था जो नहीं लिया गया। ऐसे कार्यों की कूटरचना प्रमाणित है।
कारनामे का बिन्दुवार विवरण निम्नलिखित है:-
1. धान रखने के लिए संग्रहण केंद्र मैदान तैयारी के समय का लगभग 5 लाख रु. का फर्जी बिल जिला विपणन कार्यालय को प्रस्तुत किया गया है। फर्जी बिल में लक्ष्मी ट्रेडिंग कंपनी चारभाग तथा केप कव्हर जो चबुतरा में रहा है जेसीबी से नीचे गिरा दिया गया है जो आज भी अस्तव्यस्थ रखा हुआ है, जिसका भी भारी भरकम खर्च का बिल प्रस्तुत कर राशि निकाला गया है। कहने का तात्पर्य यह है कि कार्य जोसीवी से कराया गया है बिल अलग से प्रस्तुत किया गया है जबकि राशि स्वीकृति के बाद कार्य कराने वाले व्यक्ति के खाते में सीधे जिला कार्यलय से प्रदाय किया जाना प्रस्तावित है, संभवतः ऐसा नहीं किया गया है।प्रभारी के द्वारा प्रस्तुत बिल को अधिकारियों के द्वारा सहस स्वीकार कर लिया, निरीक्षण करना आवश्यक नहीं समझा। समस्त खर्चे के बिलों का संग्रहण केंद्र में रजिस्टर संधारण किया जाना प्रस्तावित है। षड़यंत्र पूर्वक ऐसा नहीं किया गया है। जिसकी जांच किया जावे ।2. धान भूसा संग्रहण केंद्र में धान रखने के लिए उपयोग हेतु किया जाता है। प्रभारी के द्वारा धान भूसा प्राप्ति में फर्जीवाड़ा किया गया है। लगभग 300 टन भूसा सप्लायर बंसल इंटरप्रायजेस थानखम्हरिया द्वारा फर्जी ट्रकों से अर्थात ट्रक संग्रहण केंद्र में आया ही नहीं है। इनकी वजन पर्ची दैनिक कर्मचारी को दबाव बनाकर निकाला गया तथा संग्रहण केंद्र के गेट में रजिस्टर में दर्ज करते समय कैमरा को बंद कर दिया गया। उदाहरण के लिए ट्रक नंबर सीजी 08 एएच 5294, सीजी 08 एजेड 5294, सीजी 10 बीएल 3751, सीजी 10
बीजी 4819, सीजी 10 वीके 9622 यह ट्रक क्रमश: दिनांक 08.12.2024, 10.12.2024, 28.12.2024/06.01.2025/01.01.2025 धानभूसा आवक फर्जी बताया गया है। आगे
धानभूसा ट्रक में प्राप्त फर्जीवाड़ा घरमकांटा तौलपत्रक आरएसटी नं. 9218, 9853, 178,
146, 96, 9239, 9998, 260 है जो क्रमशः दिनांक 27.12.2024, 10.01.2025, 20.01.2025,
19.01.2025, 17.01.2025, 28.12.2024, 14.01.2025, 23.01.2025 प्राप्ति बताया है ।
जो फर्जी है यह प्रमाणित है। इस प्रकार से तीन सौ टन फर्जी धानभूसा प्राप्ति बताया गया है जो लगभग 40 लाख रू. कीमत का है। धानभूसा प्राप्ति में ट्रकों की फोटो फर्जी है। ट्रकों का बाहर से फोटो खींच कर गेट के फोटोग्राफर द्वारा कम्प्यूटर में दर्ज किया गया है जो स्पष्ट तौर पर कम्प्यूटर में बाहर से खींचा गया फोटो दिखाई दिया जा रहा है। ट्रक नंबर सीजी 09 जेजी 4755, सीजी 10 बीजी 4819 एवं सीजी 10 बीके 3622 धान भूसा फर्जी ट्रकों से प्राप्त बताया है तथा संग्रहण केंद्र में धान रखने के पूर्व भूसाबोरी दो लेयर स्टेक बनाना होता है वे किनारे-किनारे दो लेयर कर बांकी सिंगल लेयर किया गया है ।जिससे आने वाले समय में नीचे लेयर धान पानी एवं नमी से भारी मात्रा में खराब होगी।संग्रहण केंद्र में धान स्टेक के नीचे भूसा बोरी लेयर देखा जा सकता है। 3. धान संग्रहण केंद्र में धान प्राप्ति के समय जिस धान उपार्जन केंद्र का ट्रकों से धान प्राप्त हुआ है। यदि उसका वजन निर्धारित वजन से कम है तो उसे धान तौलपत्रक में बराबर कर ऑनलाईन पावती जारी की किया गया है। कहने का तात्पर्य है कि समिति से कम धान के बोरे वजन आने पर बराबर कर पावती दिया गया है। इसी प्रकार से समिति खैरझिटी नया 15.01.2025 को ट्रक नं. सीजी 09 जेजी 4755 900 बोरा धान निर्धारित वजन 360 क्विंटल जारी किया गया है। परंतु संग्रहण केंद्र में धान के बोरे नहीं आये खाली ट्रक लाकर गेट रजिस्टर ऑनलाईन फोटो दर्ज किया गया एवं फर्जी वजन पर्ची जारी किया गया जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसी प्रकार से धान उपार्जन केंद्र कामठी, दशरंगपुर एवं अन्य समितियों से धान प्राप्ति पर कम वजन आने पर वजन पर्ची में बराबर कर ऑनलाईन पावती दिया गया। जैसे कि समिति कामठी जारी चालान क्रमांक 00048,00086, 00047 क्रमशः दिनांक 04.01.2025, 21.01.2025, 04.01.2025 के वजन को बराबर किया गया। अन्य समितियों के धान का वजन कम आने पर ऑनलाईन पावती में उपार्जन केंद्र सरईसेत, कोदवागोडान, कुकदूर, किशुनगढ़ के भी वजन को बराबर कर दिया गया है जिसका धरमकांटा पर्ची पावती के साथ नहीं लगाया गया है जो तथ्य को छुपाने के लिए उसको निकाल दिया गया है इस प्रकार से लगभग 1700 क्विंटल धान की हेराफेरी किया गया है । कुटरचना प्रमाणित है। तौलपत्रक आरएसटी नं. 571, 581, 572 कमशः दिनांक 24.02.2025, 25.02.2025, 24.02.2025 में कम वजन आने पर पूरा कर पावती बनाया गया है। इस प्रकार धान हेराफेरी कर राशि 6270000रू. शासन को नुकसान पहुचाया गया है।
जो भारतीय दण्ड संहिता धारा 409, 420, 467 के 34 भारतीय दण्ड संहिता के तहत कार्यवाही योग्य है।
4. धान संग्रहण केंद्र में श्रमिका के कार्य का ठेकेदारी प्रथा से कार्य कराया जाता है। संग्रहण चावल केंद्र का सांई सिक्यूरिटी सर्विसेस दुर्ग के द्वारा कार्य लिया गया है। इनके द्वारा संग्रहण केंद्र में माह दिसंबर 2024 से मार्च 2025 तक बिल प्रस्तुत किया गया है। वास्तविक में संग्रहण केंद्र में अर्द्धकुशल, अकुशल मजदूर कार्यरत संख्या लगभग 35 मजदूर है परंतु जिला कार्यालय में बिल औसत 60 मजदूर का प्रस्तुत किया गया है। फर्जीवाड़ा में बाहर
एवं स्थानीय मजदूरों के नाम की सूची दिया गया है। स्थानीय मजदूर में जो कार्य में नहीं आते उसका नाम मिथलेश पिता सुदर्शन, सुखनंदन पिता रामावतार, दिनेश पिता कोमल जो प्रभारी के निजी ड्रायवर है तथा संदीप पिता केदार, पोषणलाल देवी कौशिक, गनपत कौशिक एवं ललित कौशिक शामिल है। यह तथ्य संग्रहण केंद्र के मजदूरी रजिस्टर से स्पष्ट हो जाएगा। मजदूर ठेकेदार द्वारा मजदूरों के प्रतिमाह काटी गई राशि ईपीएफ खाते में जमा नहीं किया गया है जबकि नियम यह है कि प्रथम बिल स्वीकृति के बाद दूसरा बिल प्रस्तुत के समय प्रथम विल का मजदूरी की काटी गई राशि, मजदूरवार विवरण जमा राशि का प्रस्तुत करना पड़ता है जो ऐसा नहीं किया गया है। गत वर्षों में भी मजदूरों के खाते में पीएफ राशि जमा नहीं किया गया है। धान संग्रहण केंद्र डबराभाठ मजदूरों के द्वारा पीएफ राशि निकालने के लिए ठेकेदार संपर्क करने पर स्वीकृति नहीं दि जा रही है जिससे राशि नहीं निलक रही है। ठेकेदार व्यक्ति वही है, संस्था बदलकर कार्य किया जा रहा है।
संग्रहण केंद्र में प्रभारी के द्वारा फर्जीवाड़ा करने के लिए नियोजित तरीके से मजदूरी रजिस्टर मजदूरों का भी नहीं रखा गया है। जबकि नियमानुसार संग्रहण केंद्र में कार्यरत मजदूरों को मजदूरी रजिस्टर प्रतिदिन का हस्ताक्षर युक्त रखा जाना चाहिए तथा ठेकेदार को विल प्रस्तुत के समय प्रस्तुत करना चाहिए। जो ऐसा नहीं किया गया है। जांच- के समय संग्रहण केंद्र के रजिस्टर तथा लगे कैमरे से प्रतिदिन के मजदूर को देखा जा सकता है। इस पर लगभग 1440000 रू. का विभाग को नुकसान पहुचा तथा प्रभारी जानवुझ कर मजदूरों का रजिस्टर संधारण नहीं किया गया है। अधिकारियों द्वारा ठेकेदार
की मजदूरी बिल सहस स्वीकार कर लिया गया है जबकि समय-समय पर संग्रहण केंद्र के निरीक्षण रजिस्टर में मजदूरों का निरीक्षण होना था।
5. धान संग्रहण केंद्र उपार्जन केंद्र से प्राप्त धान के कटेफटे बोरों को पल्टी करने तथा सुपेज
धान भरने के लिए मिरलर्स से 11000 नग के लगभग बारदाना प्राप्त किया गया है जिसका उपयोग सुपेज भरने मे मार्च तक 2000 नग तक किया गया है जबकि 7 लाख क्विंटल के
लगभग धान प्राप्ति पर 5000 सुपेज धान प्राप्त होना चाहिए जिसे मात्र 2000 लेकर समिति के प्राप्ति धान में हेराफेरी किया गया है। जानकारी के हिसाब से मार्च तक धान प्राप्ति के स्टाक के भरे बोरे में 2000 नग धान के बोरे कम हैं स्टाक को गिनती कर सत्यापन करने से प्रमाणित हो जाएगा तथा समिति से प्राप्त धान के कटेफटे बोरों को पल्टी नहीं किया गया है। स्टेक में स्टेकिंग कर दिया गया है जिसे धान के जावक के समय धान खराब होगा जिससे अधिक सूखत आयेगा तथा विभाग को भारी नुकसान होगा। क्योंकि ऐसा नहीं करने से धान नीचे जमीन में गिर जाऐगा।
उपरोक्तानुसार कारनामों प्रभारी द्वारा भूसा सप्लायर धान उपार्जन केंद्रों, मजदूरी ठेकेदार, पूरा बारदाना भेजे जाने वाले के साथ तथा उपार्जन केंद्र के प्रबंधक से मिलकर ट्रकों से प्राप्त कम वजन धान को बराबर करना एवं फर्जी ट्रकों से धान प्राप्ति बताना कुल राशि 55140000 लगभग का नुकसान शासन को पहुचा गया है। वर्तमान में संग्रहण केंद्र से धान प्रदाय किया जा रहा है, इसमें 6 प्रतिशत से अधिक धान कमी हो रहा है जो उपरोक्त कारनामों के कारण है। ऐसी स्थिति स्थिति में इस संग्रहण केंद्र में 7 प्रतिशत तक की धान साल्टेज प्रभारी के द्वारा दिया जाना प्रतीत होता है जो इनके कारनामों के कारण भारी भरकम क्षति है। इसकी जांच संग्रहण केंद्र में लगे कैमरे, मजदूरी रजिस्टर, भूसा रजिस्टर, ट्रक नंबर, धरमकांटा पर्ची से सूक्ष्म से सूक्ष्म जांच किया जाना आवश्यक है।
ऐसा नहीं है कि इसकी खबर विभाग में बैठे उच्च अधिकारियों को न हो जानकारी होने के बावजूद घोटालेबाज संग्रहण प्रभारी प्रीतेश पांडेय के ऊपर कोई कड़ी कार्यवाही किया गया हो क्योंकि सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार धान संग्रहण प्रभारी का रिश्ता रूलर पार्टी के बड़े नेताओं के साथ है शायद इसीलिए ये होने वाले कार्यवाही से बचते आ रहे हैं , जिला अधिकारियों के द्वारा उचित जांच नहीं करने पर प्रदेश के जांच एजेंसी को जांच हेतु पत्र भेजा जावेगा।


