ग्राम पंचायत मानिकचौरी में जल संकट का हाहाकार: बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण, प्रशासन और क्षेत्रीय विधायक-मंत्री के खोखले दावों से फूट रहा आक्रोश ।


कवर्धा
। जिला कबीरधाम के विकास खण्ड कवर्धा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मानिकचौरी में इस वक्त पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। भीषण गर्मी और तपती धूप के बीच यहाँ के ग्रामीण जल की भारी समस्या से जूझ रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि 'हर घर जल' और विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाला जिला प्रशासन और क्षेत्र के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि भी इस गंभीर संकट पर पूरी तरह मौन साधे बैठे हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।



सूख गए जलस्रोत, दूर से पानी लाने को मजबूर महिलाएँ


ग्राम पंचायत मानिकचौरी में वर्तमान स्थिति यह है कि अधिकांश हैंडपंप या तो सूख चुके हैं पूरी तरह दम तोड़ चुके हैं। पेयजल की उचित व्यवस्था न होने के कारण गाँव की महिलाओं और बुजुर्गों को इस चिलचिलाती धूप में दूर जाकर निजी नलकूपों या खेतों से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। पानी की जुगाड़ में ही ग्रामीणों का पूरा दिन बीत रहा है, जिससे उनका दैनिक रोजगार भी प्रभावित हो रहा है।

"नेताओं को सिर्फ चुनाव के वक्त जनता याद आती है। आज हम बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, लेकिन न तो प्रशासन का कोई अधिकारी सुध लेने आया और न ही हमारे विधायक-मंत्री विजय शर्मा जी को हमारी तकलीफ दिखाई दे रही है।"
आक्रोशित ग्रामीण, मानिकचौरी

नल-जल योजना पड़ी ठप, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी व्यवस्था!


ग्रामीणों का आरोप है कि शासन द्वारा चलाई जा रही नल-जल योजना मानिकचौरी में सिर्फ कागजों पर या दिखावे के लिए चल रही है। लाखों रुपये फूंकने के बाद भी आज तक ग्रामीणों के घरों तक शुद्ध पेयजल नहीं पहुँच पाया है। बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है, जिसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि पूरी व्यवस्था भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी है।

क्षेत्रीय विधायक और मंत्री विजय शर्मा की 'चुप्पी' पर उठे सवाल

यह क्षेत्र न केवल कवर्धा विकासखंड का हिस्सा है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद वीआईपी माना जाता है। इसके बावजूद, क्षेत्रीय विधायक और कैबिनेट मंत्री की इस घोर उपेक्षा ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया है। जनता का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता आज वातानुकूलित (AC) कमरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं, जबकि उनकी जनता पानी के अभाव में त्राहि-त्राहि कर रही है।

ग्रामीणों की चेतावनी: उग्र आंदोलन और चुनाव बहिष्कार की तैयारी


लगातार शिकायतों के बाद भी जब प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी, तो अब मानिकचौरी के ग्रामीणों का सब्र का बांध टूट चुका है। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर गाँव में टैंकरों के माध्यम से वैकल्पिक जल आपूर्ति शुरू नहीं की गई और स्थायी समाधान पर काम शुरू नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीण चक्काजाम और आने वाले समय में राजनीतिक कार्यक्रमों के बहिष्कार की रणनीति भी बना रहे हैं।

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