• अवैध खनन, कचरे के अंबार और शहर सहित आस पास सटे गांवों के गंदे पानी से दम तोड़ती संकरी नदी।
• सौंदर्यीकरण और सफाई के नाम पर आए करोड़ों रुपये स्वाहा, धरातल पर नतीजा सिफर।
• आसपास के गांवों में गहराया जल संकट, बीमारियों का खतरा बढ़ा।
सूखती सांसें, बहता जहर: कभी प्यास बुझाती थी, आज बीमारी बांट रही है ।
जिस संकरी नदी को इस क्षेत्र की 'जीवनदायिनी' कहा जाता था, जिसके पानी से कभी हजारों एकड़ खेत लहलहाते थे और लाखों लोगों की प्यास बुझती थी, आज वह अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। प्रशासन की नाक के नीचे इस पवित्र नदी को एक गंदे नाले में तब्दील कर दिया गया है।
नदी के इस हाल के पीछे सिर्फ मौसम की मार नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का गठजोड़ है। दर्जनों गांव सहित और शहर का कचरा सीधे नदी में बहाया जा रहा है, जिससे इसका पानी अब छूने लायक भी नहीं बचा है।
करोड़ों का बजट साफ़, पर नदी वैसी की वैसी!
सरकारी फाइलों की मानें तो पिछले कुछ वर्षों में संकरी नदी के पुनरुद्धार, गहरीकरण और सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट पास किया जा चुका है। लेकिन धरातल पर सच इसके ठीक उलट है।
कागजी सफाई: कागजों पर जेसीबी मशीनें चलीं, मजदूरी बंटी और फंड ठिकाने लगा दिया गया।
अवैध रेत व बजरी खनन का खेल: रात के अंधेरे में और कभी-कभी दिन के उजाले में भी नदी का सीना चीरकर अवैध रेत व बजरी खनन धड़ल्ले से जारी है। माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न तो एनजीटी के नियमों का खौफ है और न ही स्थानीय प्रशासन का।
ग्रामीणों का आक्रोश: साहब! नेता और अधिकारी चुनाव में आते हैं, नदी बचाने की कसमें खाते हैं और फंड डकार कर चले जाते हैं। हमारी फसलें बर्बाद हो रही हैं और बोर के पानी का लेबल कम तो कुओं का पानी भी जहरीला हो चुका है। अगर यही हाल रहा तो हम पलायन करने को मजबूर होंगे।
भूजल स्तर गिरा, बीमारियों का तांडव शुरू ।
संकरी नदी के प्रदूषित होने का सीधा असर आसपास के दर्जनों गांवों के वॉटर लेबल (भूजल स्तर) पर पड़ा है। पानी इतना दूषित हो चुका है कि लोग त्वचा रोग, पेट की गंभीर बीमारियों और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। मवेशी इस पानी को पीकर बीमार हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी एयर-कंडीशंड कमरों में बैठकर फाइलों को आगे सरकाने में व्यस्त हैं।
अधिकारियों का वही पुराना ढर्रा: 'जांच चल रही है'
जब इस मामले में संबंधित विभाग के आला अधिकारियों से बात की गई, तो उनका रटा-रटाया जवाब सामने आया— "मामला संज्ञान में है, एक जांच कमेटी गठित कर दी गई है और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।"
सवाल यह उठता है कि:
1. यह जांच कब पूरी होगी? क्या नदी के पूरी तरह खत्म होने का इंतजार किया जा रहा है?
2. सौंदर्यीकरण के नाम पर जो सरकारी पैसा बहाया गया, उसका ऑडिट क्यों नहीं होता?
3. अवैध खनन कराने वाले सफेदपोशों और भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कब कसी जाएगी?
जनता की हुंकार: अब आर-पार की लड़ाई
संकरी नदी सिर्फ एक जलस्रोत नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की संस्कृति और अस्मिता की पहचान है। स्थानीय पर्यावरणविदों और ग्रामीणों ने अब प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चेतावनी दी गई है कि अगर जल्द ही नदी की सफाई, अवैध खनन पर रोक और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो उग्र आंदोलन और चक्का जाम किया जाएगा।
'चौथी जागीर' की अपील:
अब वक्त आ गया है कि कुंभकर्णी नींद में सोए प्रशासन को जगाया जाए। संकरी नदी को बचाना सिर्फ सरकार का काम नहीं, हम सबकी जिम्मेदारी है। लेकिन सबसे पहले उस 'भ्रष्टाचार के दीमक' को खत्म करना होगा जो इस नदी के अस्तित्व को चाट रहा है।




