कबीरधाम (बोड़ला): नगर पंचायत बोड़ला में अधोसंरचना विकास के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों-करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह पैसा विकास में कम और भ्रष्टाचार की भेंट ज्यादा चढ़ रहा है। आस्था और जनचेतना का प्रमुख केंद्र माना जाने वाला हिंदू संगम स्थल इस समय खुलेआम चल रहे भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा गवाह बन गया है। इस पावन स्थल पर नाली निर्माण और आहता (बाउंड्रीवॉल) निर्माण कार्य संचालित है, जहां नियमों और स्वीकृत एस्टीमेट की धज्जियां उड़ाते हुए घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस महा-भ्रष्टाचार में सबसे शर्मनाक भूमिका नगर पंचायत के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) की सामने आ रही है। जब भी नगरवासी इस घटिया निर्माण की शिकायत लेकर जाते हैं, तो सीएमओ साहब बड़े आराम से यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं कि "हमारे पास इंजीनियर ही नहीं है।" जनता का सीधा और तीखा सवाल है कि अगर विभाग के पास तकनीकी विशेषज्ञ या सब-इंजीनियर नहीं है, तो बिना किसी तकनीकी देखरेख और सरकारी मापदंड के ठेकेदार को करोड़ों के काम की मनमानी करने की खुली छूट कैसे दे दी गई? बिना इंजीनियर के लेआउट किसने दिया और काम की अनुमति किसने दी? सीएमओ का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया साफ बयां करता है कि वे भी इस भ्रष्टाचार की गंगा में हाथ धो रहे हैं और ठेकेदार के साथ अंदरूनी तौर पर मिले हुए हैं।
हैरानी की बात यह है कि बोड़ला के इस हृदय स्थल पर रोजाना नगर के जनप्रतिनिधि और रसूखदार लोग भी निरीक्षण का नाटक करने पहुंचते हैं, लेकिन उनकी रहस्यमयी चुप्पी ने जनता के दावों को सच साबित कर दिया है। नगरवासियों का सीधा आरोप है कि ये कमीशनखोर जनप्रतिनिधि और अधिकारी ठेकेदारों से मिले हुए हैं। अपने तयशुदा कमीशन और दलाली के चक्कर में इन तथाकथित जनसेवकों ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली है और मुंह पर ताला लगा रखा है।
एस्टीमेट के विरुद्ध खुलेआम खेल: सरिया और गिट्टी में बड़ी हेराफेरी
हिंदू संगम स्थल पर चल रहे निर्माण कार्य की गुणवत्ता इतनी दयनीय है कि यह कभी भी बड़े हादसे को आमंत्रण दे सकती है। नाली निर्माण कार्य में जहां नियमानुसार 20 mm गिट्टी का उपयोग किया जाना चाहिए, वहां ठेकेदार अपनी मनमर्जी चलाते हुए बेखौफ होकर 40 mm गिट्टी का इस्तेमाल कर रहा है।
हद तो तब हो गई जब आहता (बाउंड्रीवॉल) निर्माण में सुरक्षा मानकों को ही ताक पर रख दिया गया। एस्टीमेट के मुताबिक जहां 6 रॉड डाले जाने अनिवार्य हैं, वहां मात्र 4 रॉड डालकर इतिश्री की जा रही है। यही नहीं, मजबूती के लिए तय 12 mm सरिया के स्थान पर पैसे बचाने के चक्कर में चोर-रास्ते से 10 mm सरिया का उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। पूरा का पूरा कार्य मूल स्टीमेट के बिल्कुल विपरीत और गुणवत्ताहीन तरीके से अंजाम दिया जा रहा है, जिसे सीएमओ और उनके दलाल जनप्रतिनिधि मूकदर्शक बनकर शह दे रहे हैं।
लाखों का खूबसूरत गार्डन नष्ट कर बहाई सरकारी राशि
स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि हिंदू संगम स्थल को नया रूप और कथित खूबसूरती देने के नाम पर, महज कुछ वर्ष पूर्व लाखों रुपये की लागत से बने एक बेहद खूबसूरत और व्यवस्थित गार्डन को पूरी तरह से उजाड़ दिया गया। जनता की गाढ़ी कमाई से बने उस गार्डन को नष्ट कर अब वहां भ्रष्टाचार की नई इमारत खड़ी की जा रही है। सरकारी पैसों का ऐसा दुरुपयोग प्रशासनिक लापरवाही का जीवंत उदाहरण है।
गौरतलब है कि इस स्थल पर प्रतिवर्ष भव्य हिंदू संगम का आयोजन किया जाता है, जिसमें सूबे के मुख्यमंत्री, बड़े-बड़े कैबिनेट मंत्री, राष्ट्रीय स्तर के नेता और शासन-प्रशासन के आला अधिकारी शिरकत करते हैं। इतने संवेदनशील और वीआईपी मूवमेंट वाले पवित्र स्थल पर भ्रष्टाचार का ऐसा घटिया कृत्य वाकई बेहद शर्मनाक है।
कलेक्टर तूलिका प्रजापति से न्याय की उम्मीद, जांच की मांग
अब बोड़ला की जागरूक जनता को जिले की तेजतर्रार और नई कलेक्टर तूलिका प्रजापति से भारी उम्मीदें हैं। नगरवासियों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि कलेक्टर साहिबा स्वयं तत्काल इस कार्यस्थल का औचक निरीक्षण करें। इस भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अपनाते हुए वर्तमान में चल रहे घटिया निर्माण कार्य को तुरंत रुकवाया जाए, पूर्व में किए गए दोषपूर्ण और अमानक ढांचे को पूरी तरह से ध्वस्त किया जाए। साथ ही, "इंजीनियर नहीं है" का बहाना बनाकर ठेकेदारों को खुली छूट देने वाले लापरवाह सीएमओ और दोषी ठेकेदारों को सस्पेंड व ब्लैकलिस्ट कर नए सिरे से गुणवत्तापूर्ण काम शुरू करने का निर्देश दिया जाए। जनता देखना चाहती है कि नए कलेक्टर का डंडा इन दलाल, कमीशनखोर जनप्रतिनिधियों और भ्रष्ट अधिकारियों पर कब चलता है।


